Sunday, 24 August 2014

समोसे की खुशी -


रविवार का दिन था सोचा चलो कुछ खरीदारी कर ली जाए,खरीदारी न सही कम से कम घूमना-फिरना ही हो जाएगा। यही सोच कर निकल गयी मार्किट की ओर। थोड़ी बहुत खरीदारी करके जब लौट रही थी तो एक औरत ने मुझे पीछे से आवाज़ लगाई "दीदी सुनिए",मैंने पलट कर देखा एक हट्टी -कट्टी  औरत खड़ी थी। उसने मेरी तरफ हाथ बढ़ाते हुए कहा "थोड़े पैसे दे दीजिए सुबह से कुछ नहीं खाया",यह मेरी अपनी सोच है की ऐसे लोग जो स्वस्थ हैं कुछ काम कर सकते हैं उन्हें कभी भीख नहीं देनी चाहिए।मैंने उसे समझाया की तुम्हे कुछ काम करना चाहिए,अभी तो तुम्हारे हाथ-पैर काम करने लायक हैं। पर मेरी बातों का उस पर कोई असर नहीं हुआ। वह रट लगाए थी पैसों की। कहने लगी मेरा बच्चा बीमार है,जब उसने देखा की मैं आसानी से नहीं मानूँगी तो तरह-तरह के प्रभाव गिनाने लगी "दीदी भगवान आपको लम्बी उम्र देगा,भगवान आपको खुश रखेगा,भगवान आपको बुरी नज़र से बचाएगा,भगवान आपको अछा पति देगा",मुझे उसकी बातें सुनकर गुस्सा भी आ रहा था और हँसी भी। पर मेरा निपटने का तरीका थोड़ा है,मैंने झट से बगल वाली दुकान से दो समोसे ख़रीदे और उस औरत दिए,मेरा मानना है की किसी को भीख देने से बेहतर है किसी क पेट भरना। वो बहुत खुश हुई और ख़ुशी-ख़ुशी वहां से चली गई।

1 comment:

  1. अच्छा लगा लिखते रहिये ,आगे बढते रहिये शुभकामनायें

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