समाज का चश्मा लैंन्स में औरत -
माँ कहाँ हो? जल्दी खाना लाओ?
बहरी हो गई हो क्या मेरे जूते कहाँ हैं ?
काम भी कर लिया कर महारानी, दिन भर पड़ी क्यों रहती है?
दहेज तो लाई नहीं कम से कम सास की सेवा तो किया कर?
खा-खा कर मोटी हो गयी है, लड़कियों को कम खाना चाहिए पता नहीं है क्या ?
तेरी सूरत इतनी काली है,तुझसे शादी कौन करेगा ?
मनहूस तुझे मेरे ही घर पैदा होना था?
अपना रास्ता नाप ले, टाईमपास है तो,तेरे साथ कैसे रहूँगा?
बहू घूँघट करके बैठा करो,माँ ने कुछ सीखा के नहीं भेजा?
घर के काम किया कर, तू पढ़-लिखकर क्या करेगी?
बस इतने सवाल करने के बाद समाज कहता है "हैप्पी वूमेनस डे",समाज का चश्मा और लैंन्स में औरत।
माँ कहाँ हो? जल्दी खाना लाओ?
बहरी हो गई हो क्या मेरे जूते कहाँ हैं ?
काम भी कर लिया कर महारानी, दिन भर पड़ी क्यों रहती है?
दहेज तो लाई नहीं कम से कम सास की सेवा तो किया कर?
खा-खा कर मोटी हो गयी है, लड़कियों को कम खाना चाहिए पता नहीं है क्या ?
तेरी सूरत इतनी काली है,तुझसे शादी कौन करेगा ?
मनहूस तुझे मेरे ही घर पैदा होना था?
अपना रास्ता नाप ले, टाईमपास है तो,तेरे साथ कैसे रहूँगा?
बहू घूँघट करके बैठा करो,माँ ने कुछ सीखा के नहीं भेजा?
घर के काम किया कर, तू पढ़-लिखकर क्या करेगी?
बस इतने सवाल करने के बाद समाज कहता है "हैप्पी वूमेनस डे",समाज का चश्मा और लैंन्स में औरत।

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