Thursday, 3 July 2014



बिन तेरे-

अगर मुझे उसके आने की थोड़ी भी आहट होती तो मैं पहले से खाना बनाकर रखती, जब भी वो चली जाती है मेरा सारा वक़्त वहीँ थम जाता हैन सुबह तैयार हो पाती हूँ, न खाना बन पाता है, न पढाई कर पाती हूँ और न ही कोई और काम में मेरा मन लगता हैपर वो मेरी परेशानी समझती ही नहीं, कभी भी चली जाती है और आने का कोई वक़्त भी नहींकभी तो जाते ही एकदम से फिर आकर मुझे डरा देती है और कभी-कभी तो पूरे दिन गायब रहती हैउसके आने-जाने का कोई टाइम नहीं हैमन तो करता है उसे अपने घर से निकाल दूँपर उसके बिना मेरा घर अंधकार में चला जाता है,इसलिए बस चुपचाप उसके आने का इंतज़ार करती रहती हूँअब तो वापस आ जा बिजली,गर्मी लग रही है मुझे....... :( :( :( :(

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