सिफारिश की महफ़िल-
मैं खिलाफ हूँ उन लोगों के जो सिफारिश के आधार पर नौकरियाँ बेचते हैं.दुनिया से योग्यता,प्रतिभा जैसे शब्द गायब होते जा रहे हैं.फिर तो दुनिया की ऐसा इंसान बेकार हैं जिसके पास बुद्धि हैं, सामर्थ्य है पर कोई सिफारिश नहीं है.कौन पूछेगा उन्हें? वह तो बेकार है.स्कूल,कॉलेज में पढाई की नहीं बल्कि सिफारिश करने का अभ्यास सिखाना चाहिए.कम से कम इससे उससे अच्छी नौकरी तो मिलेगी,इतनी पढाई करना तो वैसे भी व्यर्थ जाता है.मेरे ख्याल से दो विकल्प अहम हैं-या तो सिफारिश बंद हो जाए या पढाई का इतना बोझ काम हो जाए.
मैं खिलाफ हूँ उन लोगों के जो सिफारिश के आधार पर नौकरियाँ बेचते हैं.दुनिया से योग्यता,प्रतिभा जैसे शब्द गायब होते जा रहे हैं.फिर तो दुनिया की ऐसा इंसान बेकार हैं जिसके पास बुद्धि हैं, सामर्थ्य है पर कोई सिफारिश नहीं है.कौन पूछेगा उन्हें? वह तो बेकार है.स्कूल,कॉलेज में पढाई की नहीं बल्कि सिफारिश करने का अभ्यास सिखाना चाहिए.कम से कम इससे उससे अच्छी नौकरी तो मिलेगी,इतनी पढाई करना तो वैसे भी व्यर्थ जाता है.मेरे ख्याल से दो विकल्प अहम हैं-या तो सिफारिश बंद हो जाए या पढाई का इतना बोझ काम हो जाए.
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