टेलर से कपड़े लेकर जैसे ही नेहा रिक्शे में बैठी तो ऐसा लगा जैसे वह यह महौल्ला, दुकानें फिर कभी नहीं देख पाएगी। शादी के बाद उसे ससुराल जाकर कभी ऐसे यूँ बेवक़्त, बेवजह घूमने मिलेगा या नहीं। रिक्शे से उतरकर घर की ओर कदम बढ़े तो ढोलक की थाप साफ़ सुनाई देने लगी, शादी के घर में अलग ही माहौल होता है। अनगिनत पकवान, अनगिनत मेहमान और अनगिनत काम। कुल-मिलाकर सब कुछ उथल-पुथल, पर कहते हैं न की अंत भला तो सब भला। नेहा की शादी बड़ी धूम-धाम से संपन्न हुई। नेहा के सामने फूलों से सजी लाल रंग की गाड़ी खड़ी थी, या कह लीजिये एक ऐसा विमान जो उसे सात-समुन्दर पार एक नई दुनिया में ले जाने को तैयार था। एक ऐसी दुनिया जहाँ सब अनजान हैं, एक अनजान आदमी की हर चीज़ को अपनाना, उसके कमरे को अपना कमरा कहना, उसके माँ-बाप को अपने माँ-बाप कहना। पर नेहा के लिए यह कोई अनोखी बात तो नहीं थी। हमारे देश की हर लड़की के जीवन में यह क्षण तो आता ही है। पर नेहा हर उस आम लड़की जैसी कहाँ थी, उसने तो बी.एस.सी करके डॉक्टर बनने का ख्वाब देखा था पर माँ-बाप की मर्ज़ी के आगे नेहा मजबूर थी। वह मजबूर थी ऐसी अरेंज्ड मैरिज करने के लिए जिसमें उसकी मर्ज़ी एक बार भी पूछी नहीं गई।
नेहा के हस्बेंड राकेश एक कार कंपनी में मैनेजर की पोजिशन पर हैं। गाड़ी में बैठे-बैठे नेहा ने आँसू पोंछे, अचानक राकेश ने अपना रुमाल नेहा के हाथ में दिया। शादी के बाद राकेश से ली हुई यह पहली ऐसी चीज़ थी जिस पर नेहा को अपना हक महसूस हुआ।
पहले अरेंज्ड मैरिज नेहा को चुटकुला लगता था, अपनी मर्ज़ी से जीने वाली नेहा साथी भी खुद चुनेगी ऐसा यकीन था उसे, लेकिन अब खुद से समझौता करने चली थी। दरवाज़े की आहट पर नेहा ने दरवाज़ा खोला, गेट पर राकेश थे। अपने हाथ में एक पैकेट लाए थे, नेहा की मनपसंद काजू कतली थी उसमें। पैकेट नेहा को देते हुए बोले-"तुम्हारी बहन ने बताया था मुझे,तुम्हें मिठाई बहुत पसंद है। नेहा को मीठी सी ख़ुशी महसूस हुई। अगले दिन रसोई में नेहा ने पहली बार खीर बनाई पर जल्दीबाज़ी में चीनी डालना भूल गई। देवरानी-जेठानी के तानों ने नेहा को रोने पर मजबूर कर दिया, और कर भी क्या सकती थी उस अनजान घर में जहाँ माँ-बाप उसे छोड़कर हज़ारों मील दूर चले गए थे। तभी राकेश कमरे में दाखिल हुए और नेहा को पानी का गिलास थमाते हुए बोले- "तुमने खीर बहुत अच्छी बनाई थी, स्वाद खाने में नहीं तुम्हारे हाथों में है", यह सुनकर नेहा हँस दी।
राकेश लैपटॉप खोलकर बोले-"तुम्हें कुछ दिखाना है", नेहा बड़ी उत्सुकता से आँसू पोछकर स्क्रीन पर देखने लगी। राकेश ने नेहा के कॉलेज का फॉर्म भरकर भेज दिया था,एग्जाम की डेट दो दिन बाद थी। नेहा कुछ अजीब कश्मकश से जूझ रही थी। राकेश बोले - "क्यों तुम खुश नहीं हो? तुम तो डॉक्टर बनना चाहती थी? आगे की पढ़ाई नहीं करोगी? नेहा ने राकेश को गले लगा लिया और बोली-" आई लव यू राकेश! ",शादी के बाद राकेश का पहला स्पर्श नेहा के लिए खास बन गया।

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