Sunday, 15 June 2014





व्यंगात्मक दुनिया-


कभी-कभी सोचती हूँ,मैं हद से ज्यादा शान्त हूँ या दुनिया हद से ज्यादा बेबाक.किसी पर व्यंग नहीं करना चाहती पर दुनिया मुझे अनेक व्यंगों से भर देती है.बुरे से बुरे इंसान को मैंने सदैव सकारात्मकता के साथ प्रेरित किया है पर दुनिया मेरी कमियाँ निकालने में कोई कसर नहीं छोड़ती.हम सब में कोई ना कोई खूबी होती है और इस बात से हम सब वाकिफ हैं पर फिर भी हम चाहते हैं कि सामने वाला व्यक्ति हर तरह से लायक हो.यह बात हमें सना चाहिए की जिस ईश्वर की मंदिर में हम पूजा करते हैं उसी ईश्वर के बनाए इंसान का निरादर करके आप ईश्वर के दंड के भोगी हैं.          
 

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