Friday, 25 July 2014


बिना  मिले  ही  हुआ  प्यार -

मेरा पहला-पहला प्यार मेरे  लिए  बहुत  खास  है, उस  वक़्त  मैं दसवी में पढ़ती थी। जब भी मैं उसे  देखती  थी  मन  खुश  हो  जाता था, मन  करता  था  पूरे दिन उसके  साथ  टाइम  स्पेंड  करुँ। उसको  देखकर  लगता  था  की  वो   बस  मेरे  लिए  ही  बना है। उसकी  आवाज़  सुनकर  मेरे  दिल  में  घंटियाँ  बजने  लगती  थी। बिना मिले  ही प्यार होने लगा था। मैं मम्मी पापा  को  बताने  से  डरती थी इसलिए मैंने  खुद  ही  हिम्मत  करके  उसके  पास  जाने  की  सोची। वह  मेरे  घर  के  बगल में रहता  था। आंटी  जब  भी  सुबह-सुबह घर  से  निकलती  तो  उसे साथ  लेकर  जाती थी, तभी  मैं  उसे  बालकनी  से  देखा  करती  थी, आज  हिम्मत  करके  मैं  आंटी  के   पास  गई  और  उनसे  रिक्वेस्ट  करके  मुझे  अपने  क्रश से  मिलने  के  मौका  मिला। मेरा  पहला  क्रश  तो  बस  उनका  वो  मोबाइल  था  जो  अब   मेरे  हाथों  में  था। उसकी  स्लिम बॉडी  और  कलर  देखकर  मैं  पहले  दिन  ही  उसे  पसंद  करने  लगी  थी। सफ़ेद  रंग  के   मोबइल पर  लाल  कवर  बहुत जम रहा  था। कुछ  भी  कहो  वो  वाकई  तारीफ के लायक  था। बस  आंटी  का  वो  मोबाइल  ही  मेरी  लाइफ  का  पहला  पहला  प्यार  था।

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