लखनऊ से मेरा कमिटेड रिलेशनशिप -
लखनऊ से मेरा वास्तविक रिश्ता तो नहीं है पर पाँच साल से रहते-रहते यह भी अपना सा लगने लगा है,यहाँ की मिट्टी में अपनेपन की खुशबू है। मुझे लखनऊ की खास नज़ाकत और तहज़ीब वाली संस्कृति बहुत पसंद है। यहाँ का अवध खाना लाजवाब है और चिकन की कढाई जो कुर्ते और साड़ियों जैसे कपड़ों पर अपनी कलाकारी की छाप के लिए मशहूर है। लखनऊ को नवाबों का शहर कहा जाता है फिर तो हम भी नवाब हुए भई । पुराने लखनऊ में चौक का बाजार खास है,यह जगह अपनी चिकन की दुकानों और अनेक प्रकार के खान-पान के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ का अमीनाबाद ,जहाँ थोक का सामान, महिलाओं का सजावटी सामान, वस्त्र आदि मिलते हैं और दिल्ली के ही कनॉट प्लेस की तरह यहाँ हज़रतगंज है।
लखनऊ में हिन्दी और उर्दू, दोनों ही बोली जाती है, पर उर्दू को यहाँ खास महत्व दिया जाता है।प्रसिद्ध भारतीय नृत्य कत्थक ने अपना स्वरूप यहीं पाया था। लखनऊ के भातखंडे संगीत विश्वविद्यालय संगीत का पवित्र मंदिर है। विश्व भर से लोग यहां नृत्य-संगीत सीखने आते हैं।
लखनऊ का हर भोज तो मैंने चखा नहीं पर यहाँ विभिन्न तरह की बिरयानी, कबाब, कोरमा,कुल्चे, रुमाली रोटियाँ आदि फेमस हैं, जहाँ एक ओर मक्खन मलाई एवं मलाई-गिलौरी प्रसिद्ध है, वहीं अकबरी गेट पर मिलने वाले टुण्डे के कबाब भी कम मशहूर नहीं हैं, ,वैसे तो मैं वेजीटेरियन हूँ पर कबाब खाने के बारे में सोचा जा सकता है । लखनऊ की चाट मेरी सबसे पसंदीदा है और खाने के अंत में लखनऊ के पान,जिनका कोई जवाब नहीं है।
शहर में कई दर्शनीय स्थल हैं। यहाँ बड़ा एवं छोटा इमामबाड़ा प्रमुख है, जहाँ विशाल गुम्बदनुमा हॉल 50 मीटर लंबा और 15 मीटर ऊँचा है और एक अनोखी भूल भुलैया है। बड़े इमामबाड़े के बाहर ही रूमी दरवाजा बना हुआ है। यहाँ की सड़क इसके बीच से निकलती है। इस द्वार का निर्माण अकाल के दौरान बनवाया था ताकि लोगों को रोजगार मिल सके।
लखनऊ रेज़ीडेंसी में ब्रिटिश शासन के अवशेष हैं। लखनऊ का घंटाघर भारत का सबसे ऊँचा घंटाघर है। कुकरैल फॉरेस्ट एक पिकनिक स्थल है। यहाँ घड़ियाल और कछुऐ दिखते हैं। यह लखनऊ के इंदिरा नगर के निकट है। इनके अलावा रूमी दरवाजा, छतर मंजिल, हाथी पार्क, बुद्ध पार्क, नीबू पार्क, मैरीन ड्राइव और इंदिरा गाँधी तारामंडल भी दर्शनीय हैं। हम जैसे घूमने वालों के लिए लखनऊ एक बेहतरीन जगह है। लखनऊ घूमने का ज़्यादा मज़ा दर्शनीय स्थल नहीं बल्कि यहाँ की गालियां देती हैं, हर गली में एक नया रंग पाया जाता है।
लखनऊ से मेरा वास्तविक रिश्ता तो नहीं है पर पाँच साल से रहते-रहते यह भी अपना सा लगने लगा है,यहाँ की मिट्टी में अपनेपन की खुशबू है। मुझे लखनऊ की खास नज़ाकत और तहज़ीब वाली संस्कृति बहुत पसंद है। यहाँ का अवध खाना लाजवाब है और चिकन की कढाई जो कुर्ते और साड़ियों जैसे कपड़ों पर अपनी कलाकारी की छाप के लिए मशहूर है। लखनऊ को नवाबों का शहर कहा जाता है फिर तो हम भी नवाब हुए भई । पुराने लखनऊ में चौक का बाजार खास है,यह जगह अपनी चिकन की दुकानों और अनेक प्रकार के खान-पान के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ का अमीनाबाद ,जहाँ थोक का सामान, महिलाओं का सजावटी सामान, वस्त्र आदि मिलते हैं और दिल्ली के ही कनॉट प्लेस की तरह यहाँ हज़रतगंज है।
लखनऊ में हिन्दी और उर्दू, दोनों ही बोली जाती है, पर उर्दू को यहाँ खास महत्व दिया जाता है।प्रसिद्ध भारतीय नृत्य कत्थक ने अपना स्वरूप यहीं पाया था। लखनऊ के भातखंडे संगीत विश्वविद्यालय संगीत का पवित्र मंदिर है। विश्व भर से लोग यहां नृत्य-संगीत सीखने आते हैं।
लखनऊ का हर भोज तो मैंने चखा नहीं पर यहाँ विभिन्न तरह की बिरयानी, कबाब, कोरमा,कुल्चे, रुमाली रोटियाँ आदि फेमस हैं, जहाँ एक ओर मक्खन मलाई एवं मलाई-गिलौरी प्रसिद्ध है, वहीं अकबरी गेट पर मिलने वाले टुण्डे के कबाब भी कम मशहूर नहीं हैं, ,वैसे तो मैं वेजीटेरियन हूँ पर कबाब खाने के बारे में सोचा जा सकता है । लखनऊ की चाट मेरी सबसे पसंदीदा है और खाने के अंत में लखनऊ के पान,जिनका कोई जवाब नहीं है।
शहर में कई दर्शनीय स्थल हैं। यहाँ बड़ा एवं छोटा इमामबाड़ा प्रमुख है, जहाँ विशाल गुम्बदनुमा हॉल 50 मीटर लंबा और 15 मीटर ऊँचा है और एक अनोखी भूल भुलैया है। बड़े इमामबाड़े के बाहर ही रूमी दरवाजा बना हुआ है। यहाँ की सड़क इसके बीच से निकलती है। इस द्वार का निर्माण अकाल के दौरान बनवाया था ताकि लोगों को रोजगार मिल सके।
लखनऊ रेज़ीडेंसी में ब्रिटिश शासन के अवशेष हैं। लखनऊ का घंटाघर भारत का सबसे ऊँचा घंटाघर है। कुकरैल फॉरेस्ट एक पिकनिक स्थल है। यहाँ घड़ियाल और कछुऐ दिखते हैं। यह लखनऊ के इंदिरा नगर के निकट है। इनके अलावा रूमी दरवाजा, छतर मंजिल, हाथी पार्क, बुद्ध पार्क, नीबू पार्क, मैरीन ड्राइव और इंदिरा गाँधी तारामंडल भी दर्शनीय हैं। हम जैसे घूमने वालों के लिए लखनऊ एक बेहतरीन जगह है। लखनऊ घूमने का ज़्यादा मज़ा दर्शनीय स्थल नहीं बल्कि यहाँ की गालियां देती हैं, हर गली में एक नया रंग पाया जाता है।




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