Wednesday, 9 July 2014



बच्चों की मानसिकता-

चौदह साल की सीमा घर से स्कूल के लिए निकली तो थोड़ा परेशान थी। हर रोज़ घर से निकलकर उसे यह चिंता सताती थी की आज उसके साथ क्या होगाकभी अपनी कक्षा की टॉपर रही सीमा आज सब विषयों में पिछड़ती जा रही थी। इसका कारण था उसके अंदर का डरसीमा की केमिस्ट्री टीचर उसे छोटी सी गलती करने पर बहुत मारती थीं, उसके अंदर यह डर बैठ गया था कि वह केमिस्ट्री में अच्छी नहीं है जबकि पिछले साल केमिस्ट्री में उसने टॉप किया था। पर टीचर के डर ने उसके अंदर के आत्मविश्वास को मार डाला था।  अक्सर डाँटने-मारने का बच्चों पर गलत असर होता हैपर  देखा जाता है की माता-पिता और अध्यापकों के लिए यह बात समझ पाना थोड़ा मुश्किल होता हैसीमा जैसे कई और बच्चे हैं जो डर से अपनी पहचान खो देते हैंइसलिए बच्चों की क्षमता और मानसिक स्थिति को समझना बहुत ज़रूरी हैदेर करने पर परिणाम और भी घातक हो सकते हैंयदि बच्चे हर चीज़ समझ पाते तो उनमें और बड़ों में क्या अंतर रह जाता पेरेंट्स को अपने बच्चों की समय-समय पर काउन्सलिंग करनी चाहिए साथ ही टीचर्स को बच्चों पर पढ़ाई का दबाव नहीं डालना चाहिए "तारे ज़मीन पर" मूवी में आमिर खान ने यह बात बहुत बेहतरीन तरीके से बताई है। डाँटना-मारना एकमात्र उपाय नहीं हैप्यार से समझाने पर बच्चों पर बात का ज़्यादा गहरा प्रभाव पड़ता है

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