Sunday, 6 July 2014



नई सीख का सूरज-


रोज़ रात को सोने से पहले मैं यह सोचती हूँ की आज मैंने ऐसा क्या खास किया या जाना जो मुझे दूसरों से अलग बना सकता है? ऑफिस,कॉलेज जाना तो बस हमारी दिनचर्या है पर ध्यान देने योग्य बात यह है की प्रतिदिन आप दिनचर्या का पालन ही करते हैं या खोजबीन भी करते हैंयह मेरी निजी सोच है की ऐसी सुबह का क्या फायदा जिससे आप कुछ सीख ना पाएँसीखने के लिए किसी स्कूल कॉलेज के टीचर के पास जाना ज़रूरी नहीं है, ज़रूरी है यह समझना की वह सीख आपको कहाँ नज़र आ रही हैहो सकता है एक बड़े कार्यालय का अफसर आपको वह ना सीखा सके जो एक सड़क पर खड़ा गरीब आपको सीखा देज्ञान प्राप्त करने के दरवाज़े हर जगह खुले हैं बस आपकी हल की ज़रूरत है

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